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70 साल बाद भी वही शरारतें, वही अपनापन

  • तुलसी मानस की एलुमनाई मीट में ‘मुर्गा’ बने पूर्व छात्र, घूमर पर झूमीं छात्राएं
  • सुंदरकांड से शुरुआत, हनुमान चालीसा के साथ समापन
  • 67 साल बाद लौटे पूर्व मंत्री भी हुए भावुक
  • Tulsi Manas Alumni Meet Celebrates 70 Years with Sundarkand, Former Students Relive Memories After Decades

श्री तुलसी मानस मंदिर की 70वें स्थापना वर्ष पर सुंदरकांड शुरू होने से पहले विधि विधान से पूजा करते हुए यजमान रामकिशोर दरक। प्रसिद्ध सुंदरकांड गायक अमन पांडेय को तिलक लगाते हुए।

श्री तुलसी मानस एलुमनाई मीट समारोह को दीप प्रज्वलन करके शुरुआत करते हुए अतिथिगण।

अपने शानदार प्रस्तुति से सुंदरकांड के हर प्रसंग से रसाबोर करते हुए भजन और सुंदरकांड गायक अमन पांडेय

सुंदरकांड का पाठ करते हुए पूर्व विद्यार्थी कैप्टन ठाकुर कमलेश सिंह।

संतोष दुबे, नारद वार्ता संवाददाता, मुंबई: परेल स्थित श्री तुलसी मानस मंदिर और श्री तुलसी मानस हिन्दी माध्यमिक विद्यालय का 70वां स्थापना वर्ष यादों, संस्कारों और अपनत्व का ऐसा उत्सव बन गया, जिसमें हर पीढ़ी ने अपने बचपन को फिर से जी लिया। सुंदरकांड पाठ से शुरू हुआ एलुमनाई मीट सप्ताह शनिवार को हनुमान चालीसा के साथ संपन्न हुआ, लेकिन पीछे छोड़ गया भावनाओं का सैलाब।जैसे ही पुराने छात्र अपने-अपने क्लासरूम में पहुंचे, माहौल अचानक बदल गया- कहीं हंसी के ठहाके, तो कहीं आंखों में नमी।

सबसे दिलचस्प दृश्य तब देखने को मिला, जब कुछ पूर्व छात्र बचपन की यादों को ताजा करते हुए ‘मुर्गा’ बन गए। यह वही सजा थी, जो कभी स्कूल के दिनों में मिलती थी, लेकिन आज वही सजा यादों की सबसे प्यारी तस्वीर बन गई।

कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया, जब राज्य के पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद रमेश दुबे 67 साल बाद अपने स्कूल पहुंचे। जैसे ही उन्होंने स्कूल की दहलीज पर कदम रखा, उनके चेहरे पर भावनाएं साफ झलक रही थीं।

पूर्व मंत्री रमेश दुबे ने कहा,’हमारे समय में पहली पीरियड में धर्म शिक्षा अनिवार्य थी। वही संस्कार आज जीवन का आधार बने हुए हैं। यहां आकर ऐसा लग रहा है जैसे समय ठहर गया हो।’ इस एलुमनाई मीट में स्कूल के पूर्व छात्राओं ने पारंपरिक राजस्थानी ‘घूमर’ नृत्य प्रस्तुति की, जिसने पूरे सभागार को तालियों से गूंजा दिया। आधुनिकता और परंपरा का यह संगम हर किसी को आकर्षित करता रहा।

ट्रस्टी माणिक लाल शाह ने आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा,’इतनी बड़ी संख्या में पूर्व विद्यार्थियों का एक साथ आना इस बात का प्रमाण है कि तुलसी मानस सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि परिवार है।’

सम्मेलन के अतिथि और भाजपा के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्र ने कहा,दशकों बाद लौटे लोग आज भी खुद को इसी विद्यालय का बच्चा मानते हैं, यही इस संस्था की असली ताकत है।’

इस पूरे आयोजन के सूत्रधार, पूर्व विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष एन.के. पांडेय ने इसे एक मिशन बताया। उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि हर पूर्व विद्यार्थी फिर से इस परिवार से जुड़े। यह सिर्फ मिलन नहीं, बल्कि संस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प है।

53 साल बाद लौटे उद्योगपति राजपति तिवारी भी खुद को रोक नहीं सके। उन्होंने कहा, ‘यहां आकर लगा जैसे बचपन वापस मिल गया। तब जो बातें समझ नहीं आती थीं, आज वही जीवन का सबसे बड़ा सबक बन गई हैं।

विद्यालय के प्रिंसिपल अमित सिंह ने कहा कि पूर्व विद्यार्थियों का यह जुड़ाव वर्तमान छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। सप्ताहभर चले इस आयोजन में पूर्व छात्रों ने न सिर्फ अपने दोस्तों से मुलाकात की, बल्कि उन गलियारों में भी लौटे जहां से उनके सपनों ने उड़ान भरी थी। यह सिर्फ एक एलुमनाई मीट नहीं थी – यह यादों का पुनर्मिलन, संस्कारों का उत्सव और एक ऐसी विरासत का जश्न था, जो 70 साल बाद भी उतनी ही जीवंत है।

पूर्व विद्यार्थी और बिल्डर पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा, ‘मैं खास तौर पर जलगांव से इस एलुमनाई मीट में शामिल होने के लिए मुंबई आया हूं। तुलसी मानस केवल एक विद्यालय नहीं, बल्कि हमारी पहचान और संस्कारों की नींव है। इतने वर्षों बाद यहां आकर ऐसा लग रहा है जैसे फिर से वही बचपन जी रहा हूं। पुराने साथियों से मिलना और गुरुओं को याद करना मेरे लिए बेहद भावुक क्षण है।’

कार्यक्रम के सफल आयोजन में पूर्व विद्यार्थियों के बीच समन्वय और संपर्क स्थापित करने में पूर्व विद्यार्थी बेला आश की भूमिका भी सराहनीय रही। उनके इस योगदान की पूर्व मंत्री रमेश दुबे ने विशेष रूप से सराहना करते हुए उनका स्वागत किया। इस अवसर पर जगदीश तिवारी ने परिचय दिया।

तुलसी मानस एलुमनाई मीट में शामिल पूर्व विद्यार्थियों को स्मृति पत्र।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व विद्यार्थियों ने अपनी पुरानी कक्षाओं का दौरा किया और आपस में संवाद कर बीते दिनों को याद किया। इस अवसर पर सुमिता सुमन सिंह, जयंती लाल शाह, आनंद प्रकाश सिंह, पुरुषोत्तम अग्रवाल, अरुण मिश्रा, सुरेंद्र प्रताप जायसवाल, जगदीश तिवारी, अशोक जायसवाल, रमेश लोढ़ा, शांतिलाल जैन, मोहन सिंह, बेला आश, कैप्टन कमलेश सिंह, अखिलेश गुप्ता, ईश्वरचंद साव, मदन जैन, हीना जैन, राज तिवारी, भरत जैन, कैप्टन जीवन तिवारी सहित बड़ी संख्या में पूर्व छात्र और गणमान्य उपस्थित थे।

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