कजरी के सुरों में गंगा-सह्याद्रि का मिलन, लोकसंस्कृति ने जोड़ा महाराष्ट्र और उत्तर भारत
- मुंबई में 15 दिवसीय कजरी महोत्सव का समापन, गंगा-सह्याद्रि के सुरों ने जोड़ा महाराष्ट्र और उत्तर भारत

संतोष दुबे, नारद वार्ता संवाददाता, मुंबई: सावन की कजरी के सुर जब महाराष्ट्र के मराठी लोकगीतों से मिले तो मुंबई में गंगा और सह्याद्रि का सांस्कृतिक संगम देखने को मिला। अभियान संस्था की ओर से आयोजित 15 दिवसीय कजरी महोत्सव का समापन स्वतंत्रता दिवस पर विलेपार्ले स्थित दीनानाथ मंगेशकर हॉल में हुआ। समारोह में बड़ी संख्या में महिलाओं और बेटियों ने हिस्सा लिया। दहिसर से शुरू हुआ यह सांस्कृतिक सफर दीवा, डोंबिवली, मीरा रोड, भाईंदर, नालासोपारा, भांडुप, चर्चगेट, वसई, बोरीवली, विलेपार्ले और ठाणे सहित मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचा।
काशी, अवध और मिर्जापुर की कजरी से सजा मंच
महोत्सव में बनारस, अवध और मिर्जापुर की पारंपरिक कजरियों के साथ महाराष्ट्र के राज्यगीत और मराठी लोकगीतों की प्रस्तुतियां हुईं। कजरी गायिका संजोली पांडेय ने अपनी प्रस्तुतियों से सावन की लोकपरंपरा और उत्तर भारतीय लोकभावना को जीवंत किया। महिलाओं के लिए झूला, मेंहदी और अन्य पारंपरिक इंतजाम भी किए गए। इससे महानगर में रहने वाली महिलाओं को अपनी लोकसंस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिला।
महिलाओं और बेटियों को जोड़ने का प्रयास
अभियान के संस्थापक और मुंबई बीजेपी के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्र ने कहा, ‘यह आयोजन उत्तर भारतीय समाज की महिलाओं और बेटियों को जोड़ने का माध्यम बना। कजरी और मराठी लोकगीतों ने दोनों संस्कृतियों को करीब लाया। लोकगीत हमारी पहचान और जड़ों की आवाज हैं।आयोजकों के अनुसार, महोत्सव के अलग-अलग आयोजनों में प्रतिदिन करीब एक हजार महिलाओं ने भाग लिया। अभियान और संजोली की सोशल पोस्ट के माध्यम प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहभागिता और सामाजिक माध्यमों के जरिए करीब एक लाख लोगों तक महोत्सव का संदेश पहुंचा।
‘कजरी हमारी मिट्टी और भावनाओं की आवाज
संजोली पांडेय ने कहा, कजरी हमारी मिट्टी और भावनाओं की आवाज है। जब यह महाराष्ट्र के लोकगीतों के साथ गूंजती है तो लगता है कि गंगा और सह्याद्रि के बीच कोई दूरी नहीं। संगीत संस्कृतियों को जोड़ता है।
स्त्री शक्ति को मिला सम्मान
समापन समारोह में अभिनेत्री श्वेता पेंडसे, केतकी सराफ, कबड्डी की स्वर्ण पदक विजेता शेरेना भास्कर, अनन्या शर्मा, वैलेरी लोबो और सुमन शर्मा को स्त्री शक्ति सम्मान से सम्मानित किया गया। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार ने अपने हाथों से सम्मान प्रदान किया।समारोह में डॉ. शीतला प्रसाद दुबे, राकेश सिंह, संतोष जायसवाल, मनोज सिंह, शंभू सिंह और रेनू दुबे सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
लोकगीतों से मजबूत हुई सांस्कृतिक डोर
कजरी महोत्सव ने सावन की लोकपरंपरा को मुंबई की महानगरीय संस्कृति से जोड़ने के साथ महाराष्ट्र और उत्तर भारत के बीच सांस्कृतिक संवाद को भी मजबूत किया। काशी, अवध और मिर्जापुर की कजरी जब मराठी लोकगीतों के साथ गूंजी तो यह संदेश भी सामने आया कि भाषा और क्षेत्र अलग हो सकते हैं, लेकिन लोकसंस्कृति लोगों को एक सूत्र में जोड़ सकती है। महोत्सव ने इसी भावना के साथ ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संदेश को सुर दिया।
