₹702 करोड़ रुपये में बनेगा महालक्ष्मी का भूमिगत वॉकवे
– बीएमसी की तिजोरी से पैसा, विपक्ष ने उठाए सवाल
– मेट्रो स्टेशन से समुद्र किनारे तक सीधे पहुंचेंगे यात्री- स्थायी समिति में बहुमत के दम पर प्रस्ताव मंजूर

प्रीती पांडेय, नारद वार्ता संवाददाता, मुंबई:
#महालक्ष्मी में मेट्रो से उतरकर समुद्र किनारे बने प्रोमेनेड और प्रस्तावित लैंडस्केप गार्डन तक पहुंचना अब आसान होने वाला है। #बीएमसी स्थायी समिति ने 702 करोड़ 44 लाख रुपये की लागत वाले भूमिगत पैदल मार्ग के प्रस्ताव को गुरुवार को मंजूरी दे दी। खास बात यह है कि परियोजना का पूरा आर्थिक भार बीएमसी उठाएगी, जबकि इसका निर्माण मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (#एमएमआरसीएल) करेगा। प्रस्ताव को लेकर विपक्ष ने बीएमसी की आर्थिक स्थिति और इतनी बड़ी रकम खर्च करने की जरूरत पर सवाल उठाए। हालांकि, सत्ताधारी महायुति के बहुमत के कारण प्रस्ताव पारित हो गया।यह भूमिगत मार्ग नेहरू विज्ञान केंद्र मेट्रो स्टेशन से महालक्ष्मी रेसकोर्स क्षेत्र होते हुए लाला लाजपत राय रोड के नीचे से वर्ली प्रोमेनेड और प्रस्तावित लैंडस्केप गार्डन को जोड़ेगा। इसकी चौड़ाई करीब 7.5 मीटर होगी। बीएमसी के अनुसार, यह मार्ग भविष्य में मेट्रो, कोस्टल रोड, समुद्र किनारे के प्रोमेनेड और लैंडस्केप गार्डन के बीच महत्वपूर्ण पैदल संपर्क बनेगा।
मेट्रो से उतरिए और पैदल पहुंचिए समुद्र किनारे
परियोजना का सबसे बड़ा फायदा सार्वजनिक परिवहन से आने वाले लोगों को होगा। कोस्टल रोड के पास करीब 300 एकड़ में लैंडस्केप गार्डन विकसित करने का प्रस्ताव है। फिलहाल इस इलाके में निजी वाहनों से पहुंचना आसान है, लेकिन मेट्रो या पैदल आने वालों के लिए सीधी कनेक्टिविटी नहीं है। भूमिगत मार्ग बनने के बाद मेट्रो स्टेशन से सीधे प्रोमेनेड और गार्डन तक पैदल पहुंचा जा सकेगा।
बीएमसी स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने कहा कि इस कनेक्टिविटी से निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। इससे वर्ली-महालक्ष्मी क्षेत्र में पर्यटन को भी गति मिलने की उम्मीद है।
बीएमसी की तिजोरी पर इतना बोझ क्यों?
हालांकि, प्रस्ताव पर बैठक में विपक्ष ने तीखा विरोध किया। सदस्य यशवंत किल्लेदार ने सवाल उठाया कि बीएमसी की तिजोरी पर इतना बड़ा आर्थिक भार क्यों डाला जा रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या राज्य सरकार के पास इस परियोजना के लिए धन नहीं है।
कांग्रेस गटनेता अशरफ आजमी ने भी 702 करोड़ रुपये खर्च करने की जरूरत पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि बीएमसी पर पहले से ठेकेदारों के भुगतान का बड़ा बोझ है और उसके आय के स्रोत लगातार कम हो रहे हैं। उन्होंने ग्रीन बॉन्ड जारी करने की तैयारी का भी मुद्दा उठाया।
काम कोई और, पैसा बीएमसी का क्यों?
स्थायी समिति सदस्य जमी़र कुरैशी ने सवाल उठाया कि जब बीएमसी खुद इस तरह की परियोजना करा सकती है तो उसे एमएमआरसीएल के माध्यम से क्यों कराया जा रहा है। उन्होंने परियोजना में भुगतान की शर्तों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस पर दोबारा विचार होना चाहिए।
पहले ही शुरू हो गई थी तैयारी
बीएमसी के अनुसार, एमएमआरसीएल ने जून 2025 में भूमिगत मार्ग के निर्माण की तैयारी जताई थी। दिसंबर 2025 में बीएमसी ने यह काम एमएमआरसीएल के माध्यम से कराने को मंजूरी दी थी। अब स्थायी समिति की मंजूरी के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
