अब मैदान में दिखेगा शेखावाटी का दम

Gen Z-Gen Alpha के लिए खेल अकादमी में ट्रेनिंग से करियर तक का इंतजाम

प्रीती पांडेय, नारद वार्ता संवाददाता, मुंबई

शेखावाटी की खेल प्रतिभाओं को अब गांव-कस्बों से निकालकर बेहतर प्रशिक्षण और बड़े मंच तक पहुंचाने की तैयारी है। राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से रामगढ़ शेखावाटी परिषद मुंबई की ओर से रामनारायण रुइया शेखावाटी स्पोर्ट्स अकादमी विकसित की जा रही है। शुक्रवार को मुंबई के लोअर परेल स्थित सेंट रेजिस होटल में जुटे शेखावाटी के प्रवासियों ने इस पहल के जरिए खेल को नई पीढ़ी के लिए शौक से आगे बढ़ाकर करियर और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाने पर मंथन किया। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने खेल प्रतिभाओं को जमीनी स्तर पर पहचानने और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि करीब 100 करोड़ रुपये की यह परियोजना बिना किसी सरकारी मदद के समाज की ओर से की जा रही है। यह अपनी मातृभूमि के प्रति समाज के प्रेम और जिम्मेदारी को दर्शाता है।

गांव-कस्बों से होगी प्रतिभाओं की तलाश

आयोजकों के अनुसार, आज की Gen Z और Gen Alpha पीढ़ी डिजिटल दुनिया से गहराई से जुड़ी है, लेकिन उसमें खेलों के क्षेत्र में भारत को नई ऊंचाई तक ले जाने की क्षमता भी है। इसी सोच के साथ अकादमी के जरिए ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करने की योजना है। अकादमी परिसर से बाहर भी टैलेंट स्काउटिंग, स्थानीय प्रतियोगिताएं और कोचिंग कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके जरिए उन बच्चों तक पहुंचने की कोशिश होगी, जिनमें प्रतिभा तो है लेकिन संसाधनों, प्रशिक्षण या अवसरों की कमी के कारण वे आगे नहीं बढ़ पाते। खेलों में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी को भी इस अभियान में महत्व दिया जाएगा।

प्रतिभा को प्रदर्शन में बदलने पर फोकस

अकादमी की ट्रस्टी अमला रुइया ने कहा कि प्रतिभा किसी एक शहर या वर्ग की मोहताज नहीं होती। प्रयास यह है कि किसी बच्चे में खेल की प्रतिभा दिखाई दे तो उसे सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, प्रतियोगिता और अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रतिभा को प्रदर्शन में बदलने का पूरा रास्ता तैयार करना अकादमी का लक्ष्य है।

खेल के साथ शिक्षा और रोजगार

रामगढ़ शेखावाटी परिषद मुंबई के सचिव सुरेश पंसारी ने कहा कि किसी बच्चे की प्रतिभा उसके आर्थिक या सामाजिक परिवेश के कारण रुकनी नहीं चाहिए। खेल के साथ शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर जोड़कर शेखावाटी में मजबूत खेल संस्कृति विकसित करना उद्देश्य है। अकादमी में बीपीएड और एमपीएड जैसे पाठ्यक्रमों के लिए टीचर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट प्रस्तावित है। इससे खेल प्रतिभाओं के साथ प्रशिक्षित स्पोर्ट्स शिक्षकों और कोचिंग से जुड़े मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा सकेगा।

डिफेंस सेवाओं की तैयारी की भी योजना

इस पहल में खेल के साथ युवाओं को रोजगार और सेवा के अन्य अवसरों से जोड़ने पर भी जोर है। शेखावाटी डिफेंस अकादमी के माध्यम से अग्निवीर, बीएसएफ, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स जैसी सेवाओं की तैयारी के साथ आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

16 एकड़ में विकसित हो रही स्पोर्ट्स अकादमी

ट्रस्टी संजय कीर्तनिया के अनुसार, करीब 16 एकड़ क्षेत्र में स्पोर्ट्स अकादमी विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों की प्रतिभाओं के लिए ऐसा पूरा स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां प्रतिभा की पहचान से लेकर प्रशिक्षण, प्रतियोगिता और आगे के अवसरों तक की व्यवस्था उपलब्ध हो सके।इस मॉडल में खेल को शिक्षा और करियर से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, ताकि युवा केवल खिलाड़ी के रूप में ही नहीं, बल्कि कोच, प्रशिक्षक और खेल से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी अपना भविष्य बना सकें।

प्रवासी समाज की भागीदारी

इस पहल के पीछे शेखावाटी के प्रवासी समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में मुकुल अग्रवाल, कमल पोद्दार, दिलीप पीरामल, संजय कीर्तनिया, कमल राजपुरिया, राजेंद्र रुइया, सुशील गाड़िया, राजकुमार सेक्सरिया, नवीन पंसारी और सज्जन गोयनका सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

शेखावाटी के लिए क्यों अहम है पहल?

शेखावाटी की पहचान शिक्षा और सैन्य सेवाओं में मजबूत उपस्थिति वाले क्षेत्र के रूप में रही है। अब खेल प्रतिभाओं को व्यवस्थित मंच देने की पहल के जरिए क्षेत्र की नई पीढ़ी के लिए एक और करियर विकल्प तैयार करने की कोशिश हो रही है। यदि जमीनी स्तर पर टैलेंट स्काउटिंग, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं की व्यवस्था प्रभावी ढंग से आगे बढ़ती है, तो ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के कई प्रतिभाशाली युवाओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है।

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