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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र का इस्तीफा

नारद वार्ता, अयोध्या/ जौनपुर: राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने बड़ा मोड़ ले लिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और न्यासी डॉ. अनिल मिश्र ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने शनिवार को दोनों के त्यागपत्र मिलने की आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि इन पर ट्रस्ट की अगली बैठक में विचार किया जाएगा। ट्रस्ट ने पूरे घटनाक्रम पर दुख जताते हुए कहा कि हाल के घटनाक्रम से वह स्तब्ध और आहत है तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

ट्रस्ट की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि रामभक्तों का विश्वास सर्वोपरि है। इसी कारण मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की है।

दबाव के बीच सामने आया फैसला

सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा प्रकरण में एसआईटी की प्रारंभिक जांच के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला। रिपोर्ट मिलने के बाद एफआईआर दर्ज की गई और जांच का दायरा बढ़ा। इसके बाद ट्रस्ट नेतृत्व में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके बीच महासचिव चंपत राय और न्यासी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे सामने आए। बताया जा रहा है कि विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से भी फिलहाल वित्तीय कार्यों की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। ट्रस्ट की अगली बैठक 11 जुलाई के आसपास बुलाए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें आगे की प्रशासनिक व्यवस्था पर निर्णय लिया जा सकता है।

श्रद्धालुओं को दिया भरोसा

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं द्वारा भगवान श्रीराम को समर्पित चांदी की ईंटें, आभूषण तथा अन्य मूल्यवान वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उनका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है। ट्रस्ट का कहना है कि एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर ही उसकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज कराई गई है।

नोटों के बंडल बनाते समय हेराफेरी की आशंका

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मामले में नामजद आठ आरोपियों में से छह की जिम्मेदारी नोट गिनने की नहीं, बल्कि दानपात्रों से निकले नोटों को सीधा कर उनके बंडल तैयार करने की थी। जांच एजेंसियों को आशंका है कि कथित हेराफेरी इसी प्रक्रिया के दौरान हुई। फिलहाल इस पहलू की भी गहन जांच की जा रही है।

जमीन सौदों की भी होगी जांच

चढ़ावा प्रकरण के साथ-साथ राम मंदिर से जुड़े भूमि खरीद मामलों की भी जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। आरोप हैं कि कुछ जमीनें बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर खरीदी गईं। एसआईटी अब इन सौदों की भी जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं।

ट्रस्ट ने अपने बयान में कहा है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए आवश्यक संस्थागत कदम उठाए जाएंगे। साथ ही यह भी भरोसा दिलाया गया है कि जांच पूरी पारदर्शिता से होगी और सत्य सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय आस्था के केंद्र से जुड़े इस मामले में इस्तीफों के बाद अब सभी की नजर एसआईटी की विस्तृत जांच और ट्रस्ट की अगली बैठक पर टिकी है, जहां आगे की कार्रवाई और प्रशासनिक बदलावों को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

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