- ₹2 करोड़ जमा कराने की कवायद के बीच कोर्ट की कड़ी टिप्पणी; तीन महीने की सजा को दो साल तक बढ़ाने की चेतावनी,
- ₹1.15 करोड़ आज और ₹85 लाख सोमवार को जमा कराने का प्रस्ताव
नारद वार्ता संवाददाता, मुंबई/ नई दिल्ली: अभिनेता राजपाल यादव से जुड़े चेक-बाउंस मामले की बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में कोर्ट का रुख बेहद सख्त रहा। सुनवाई के दौरान जब राजपाल यादव की ओर से उनके पुराने फिल्म प्रोजेक्ट ‘अता पता लापता’ का हवाला देते हुए आर्थिक परिस्थितियों का पक्ष रखा गया, तो मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि“अब पैसा लापता है।” इसी सुनवाई में कोर्ट ने राजपाल यादव को सुनाई गई तीन महीने की सजा को लेकर भी गंभीर रुख दिखाया और सजा को बढ़ाकर दो साल करने तक की चेतावनी दी। हालांकि, कोर्ट ने तत्काल राहत का रास्ता भी खुला रखा और शिकायतकर्ता के हित में भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ा। सुनवाई का तत्काल मुद्दा कोर्ट के पहले दिए गए निर्देश के तहत ₹2 करोड़ जमा कराने से जुड़ा था।
अब पैसा लापता है’—फिल्म के नाम पर कोर्ट की चुटकी
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से पेश वकील ने अभिनेता की फिल्म ‘अता पता लापता’ का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि फिल्म एक संयुक्त उपक्रम थी और परिस्थितियां उनके मुवक्किल के लिए प्रतिकूल हो गईं।इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की,“अब पैसा लापता है।” कोर्ट की यह टिप्पणी सुनवाई का सबसे उल्लेखनीय क्षण रही। इसके साथ ही पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया कि भुगतान संबंधी पहले के निर्देशों का पालन गंभीरता से किया जाना चाहिए।
सजा बढ़ाकर दो साल करने की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को मिली सजा के बारे में भी सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि उनके मुवक्किल को कितनी सजा सुनाई गई है। जवाब में बताया गया कि तीन महीने की सजा है और राजपाल यादव ने एक दिन भी सजा नहीं काटी है। उनके वकील ने इसे सिविल इम्प्रिजनमेंट बताया। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने सख्त रुख अपनाते हुए सजा बढ़ाकर दो साल करने के लिए नोटिस जारी करने की चेतावनी दी।राजपाल यादव की ओर से उनके वकील ने कोर्ट से उनकी भुगतान करने की कोशिश को देखते हुए राहत देने का आग्रह किया और कहा कि वह समाधान की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। लेकिन न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि कोर्ट इस आचरण से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि कोर्ट न तो राजपाल यादव की बोना फाइड्स से प्रभावित है और न ही मामले के मेरिट से। कोर्ट की ओर से राहत पर विचार शिकायतकर्ता को न्याय दिलाने के लिए किया जा रहा है।
₹2 करोड़ जमा कराने की स्थिति क्या है?
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से बताया गया कि ₹1.15 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट तैयार है और इसे कोर्ट की रजिस्ट्री में दिन के दौरान जमा कराया जाएगा। वकील ने बताया कि वह पहले रजिस्ट्री में राशि जमा कराने गए थे, लेकिन डिमांड ड्राफ्ट और आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान को लेकर प्रक्रिया संबंधी समस्या आई। रजिस्ट्री ने स्पष्ट किया कि नियमों के तहत आरटीजीएस स्वीकार नहीं किया जा सकता।इसके बाद डिमांड ड्राफ्ट के जरिए राशि जमा कराने की व्यवस्था की गई।
₹85 लाख देने को तैयार संपत्ति का खरीदार
शेष ₹85 लाख की व्यवस्था के लिए राजपाल यादव की पुश्तैनी संपत्ति के संभावित खरीदार आनंद प्रकाश यादव कोर्ट में मौजूद थे। राजपाल यादव के वकील ने बताया कि संभावित खरीदार ₹85 लाख देने को तैयार हैं। हालांकि, खरीदार फिलहाल बिक्री दस्तावेजों का पंजीकरण नहीं कराना चाहता। वकील ने बताया कि पितृपक्ष चल रहा है और खरीदार नवरात्र शुरू होने के बाद पंजीकरण कराना चाहता है। इसके बावजूद वह ₹85 लाख अग्रिम देने को तैयार है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, संभावित खरीदार सोमवार को ₹85 लाख का डिमांड ड्राफ्ट रजिस्ट्री में जमा करने को तैयार है।
₹30 करोड़ से अधिक की संपत्ति का जिक्र
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पूछा कि संपत्ति का कुल बिक्री मूल्य कितना है, क्योंकि देनदारी ₹2 करोड़ से काफी अधिक है। राजपाल यादव के वकील ने बताया कि पुश्तैनी संपत्ति की कीमत ₹30 करोड़ से अधिक है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी पूछा कि क्या संभावित खरीदार के पास भुगतान करने की पर्याप्त क्षमता है। वकील ने इसका जवाब हां में दिया।
शिकायतकर्ता भी तीन महीने का समय देने को तैयार
शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि यदि ₹2 करोड़ जमा करा दिए जाते हैं तो शेष राशि के भुगतान के लिए तीन महीने का समय दिया जा सकता है। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भुगतान की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए कहा कि ₹1.15 करोड़ आज जमा होंगे और ₹85 लाख सोमवार को आएंगे। इसके बाद शेष राशि के भुगतान के लिए एक शेड्यूल तय किया जाएगा। कोर्ट ने संभावित खरीदार से भी आवश्यक अंडरटेकिंग लेने की बात कही।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ₹1.15 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट दिन के दौरान रजिस्ट्री में जमा कराया जाए। ₹85 लाख सोमवार को संभावित खरीदार द्वारा डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से जमा किए जाने हैं।इसके बाद राजपाल यादव को सशर्त राहत देने पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने मामले को दो सप्ताह बाद फिर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। इस तरह आज की सुनवाई में एक तरफ कोर्ट ने भुगतान को लेकर सख्ती दिखाई और सजा बढ़ाने की चेतावनी दी, वहीं दूसरी तरफ ₹2 करोड़ की तत्काल व्यवस्था के लिए एक व्यावहारिक रास्ता भी सामने आया है।

