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महाकुंभ में बिछड़े 54,000 से अधिक लोग अपनों से मिले

  • Over 54,000 Missing People Reunited with Families at Maha Kumbh

Narad Varta, नारद वार्ता संवाददाता, प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान 54,375 लोग अपने परिवार से बिछड़ गए, जिन्हें प्रशासन और गैर-सरकारी संगठनों की मदद से पुनर्मिलन कराया गया।

66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने किया स्नान

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, महाकुंभ मेले में देश-विदेश से आए 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई। इसी बीच, भीड़ में बिछड़े हजारों लोगों को डिजिटल खोया-पाया केंद्रों और स्वयंसेवी संगठनों की सहायता से खोजकर उनके परिवारों से मिलाने का कार्य किया गया।

डिजिटल खोया-पाया केंद्रों से 35,083 लोगों का पुनर्मिलन

प्रदेश सरकार ने महाकुंभ में खोए लोगों को शीघ्रता से खोजने और उनके परिवारों से मिलाने के लिए 10 डिजिटल खोया-पाया केंद्रों की स्थापना की थी। इन केंद्रों के माध्यम से 35,083 बिछड़े लोगों को उनके परिजनों से मिलाया गया। बयान के अनुसार, विभिन्न स्नान पर्वों के दौरान खोए हुए श्रद्धालुओं को निम्नानुसार पुनर्मिलन कराया गया:

  • मकर संक्रांति: 598 श्रद्धालु
  • मौनी अमावस्या: 8,725 श्रद्धालु
  • बसंत पंचमी: 864 श्रद्धालु
  • अन्य पर्व और सामान्य दिन: 24,896 श्रद्धालु

AI और मशीन लर्निंग से लैस खोया-पाया केंद्र

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर खोया-पाया केंद्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम, मशीन लर्निंग और बहुभाषीय सहायता जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया था। इन तकनीकों के कारण बिछड़े लोगों को तेजी से खोजकर उनके परिवारों से मिलाया गया।

गैर-सरकारी संगठनों का योगदान

बिछड़े लोगों को उनके परिजनों से मिलाने में गैर-सरकारी संगठनों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

– भारत सेवा दल द्वारा 19,274 बिछड़े लोगों को उनके परिवारों से मिलाया गया।

– हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति समिति ने भी पुनर्मिलन के कार्य में योगदान दिया।

भारत सेवा दल के संचालक उमेश चंद्र तिवारी ने बताया कि इस वर्ष के महाकुंभ में 18 बिछड़े बच्चों को भी उनके माता-पिता से मिलाने में सफलता मिली।

प्रेरणादायक पुनर्मिलन की कहानियां

महाकुंभ के अंतिम दिन बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी कपलेश्वर साहनी की सास कृष्णा देवी को खोया-पाया केंद्र की मदद से उनके परिवार से मिलाया गया। इसी तरह, छत्तीसगढ़ के रायपुर निवासी बृजलाल चौहान की पत्नी जंगी देवी को भी उनके घर भेजा गया।

आस्था और तकनीक का संगम

महाकुंभ 2025 में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सरकार की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे।

आधुनिक तकनीकों और प्रशासनिक सतर्कता के कारण इस वर्ष हजारों बिछड़े श्रद्धालु तेजी से अपने परिवारों से मिल पाए, जो इस महाकुंभ की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही।

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