भारत के बच्चों की वैज्ञानिक छलांग: मझगांव साइंस एग्जिबिशन में AI–रोबोटिक्स ने दिखाया भविष्य

संतोष दुबे, नारद वार्ता संवाददाता, मुंबई: मझगांव में आयोजित 53वीं साइंस एक्ज़िबिशन ने यह दिखा दिया कि भारत की नई पीढ़ी तकनीक की दुनिया में वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने के लिए तैयार है। रोबोटिक्स, AI, हेल्थ टेक्नोलॉजी और स्मार्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स ने न सिर्फ दर्शकों को प्रभावित किया, बल्कि इस स्थानीय प्रदर्शनी को चर्चा का केंद्र बना दिया। प्रदर्शनी का उद्घाटन दक्षिण मुंबई की शिक्षा निरीक्षक डॉ. वैशाली वीर ने किया।

मझगांव स्थित सेंट मैरी हाई स्कूल में दो दिनों तक चली विज्ञान प्रदर्शनी ने देश की उभरती वैज्ञानिक प्रतिभा की अभूतपूर्व झलक दिखाई। ई एवं एफ साउथ वार्ड द्वारा आयोजित इस 53वीं साइंस एक्ज़िबिशन में बच्चों ने ऐसे मॉडल पेश किए, जिनसे यह स्पष्ट हो गया कि भारत की नई पीढ़ी अब वैज्ञानिक प्रयोगशाला से नहीं डरती, बल्कि उसे अपना भविष्य मानती है।सबसे अधिक ध्यान उस स्टॉल ने खींचा जहां छात्रों ने मल्टीलैंग्वेज AI रोबोट तैयार किया था। यह रोबोट हिंदी, अंग्रेज़ी, मराठी समेत कई भाषाओं को तुरंत अनुवाद कर देता था। बच्चे उससे सवाल पूछते जाते और रोबोट एक सेकंड में जवाब। अभिभावकों के चेहरे पर गर्व और आश्चर्य दोनों नजर आ रहे थे। यह मॉडल इस बात का संकेत था कि भारत के स्कूली छात्र अब AI के सिद्धांत नहीं, बल्कि उसकी असल दुनिया में उपयोगिता समझने लगे हैं।एक शिक्षक ने मुस्कराते हुए कहा, ‘अगर ये बच्चे अभी से इतना कर रहे हैं, तो इंडिया का टेक्नोलॉजी फ्यूचर दुनिया को चौंका देगा।’

हार्ट हेल्थ अवेयरनेस मॉडल बना जीवनरक्षक सीख का केंद्र

प्रदर्शनी का दूसरा सबसे आकर्षक मॉडल था हार्ट हेल्थ सिस्टम। इस मॉडल में हृदय की धड़कन, ब्लॉकेज, हार्ट अटैक के कारण और बचाव उपायों को बेहद सरल भाषा में समझाया गया था। इंटरैक्टिव स्क्रीन देखकर कई अभिभावकों ने कहा कि बच्चों ने विज्ञान के साथ स्वास्थ्य जागरूकता का शानदार संयोजन किया है। एक प्रतिभागी स्टूडेंट्स ने बताया,’हम चाहते थे कि लोग समझें कि हेल्थ टेक्नोलॉजी सिर्फ अस्पतालों में नहीं, हमारे सीखने का हिस्सा भी हो सकती है।’

शिक्षा अधिकारियों ने की नई सोच की तारीफ

दक्षिण मुंबई की शिक्षा निरीक्षक डॉ. वैशाली वीर ने बच्चों के मॉडल देखकर कहा,’बच्चे देश का भविष्य नहीं, भविष्य का 100% हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही भारत की प्रगति का रास्ता तैयार करता है।’ विशिष्ट अतिथि डॉ. ललिता दरेश्वर ने बच्चों को प्रयोग आधारित सीख अपनाने की प्रेरणा दी।

सर एल्ली कडूरी स्कूल के प्रिंसिपल धर्मेंद्र वाघ ने कहा,’विज्ञान शिक्षा बच्चों में नई सोच और समाधान खोजने की क्षमता विकसित करती है। यही जिज्ञासा भारत को विकसित और आत्मनिर्भर बनाएगी।’

श्री तुलसी हिंदी माध्यमिक एवं जूनियर कॉलेज के प्रिंसिपल अमित सिंह ने कहा, ‘जब बच्चे विज्ञान को हाथों से बनाते हैं, तो वह पाठ्यपुस्तक से भी ज्यादा गहरा ज्ञान देता है।’

उप शिक्षा निरीक्षक प्रशांत महाबोले ने STEM शिक्षा की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, ‘STEM बच्चों को ज्ञान का उपभोक्ता नहीं, नवाचार का निर्माता बनाता है।’

स्मार्ट सिटी, डिज़ास्टर मैनेजमेंट और ग्रीन एनर्जी मॉडल भी चर्चा में प्रदर्शनी में बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मॉडल भी प्रस्तुत किए। इसमें स्मार्ट सिटी मॉडल, डिज़ास्टर मैनेजमेंट सिस्टम, सोलर बेस्ड एनर्जी मॉडल, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग तकनीक, कचरे से ऊर्जा बनाने का प्रयास आदि शामिल था। प्रदर्शनी का हर मॉडल बच्चों की वैज्ञानिक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी दोनों को दर्शाता था।

एक छोटा-सा एग्जिबिशन, लेकिन देश के भविष्य की बड़ी तस्वीर

मझगांव की यह प्रदर्शनी यह संदेश देकर खत्म हुई कि भारत का वैज्ञानिक भविष्य सुरक्षित है, क्योंकि उसके बच्चों के पास जिज्ञासा, क्षमता और तकनीक—तीनों मौजूद हैं।आज के ये छोटे वैज्ञानिक कल भारतीय विज्ञान, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की दिशा तय करने वाले हैं।

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