मुंबई में कजरी पर झूमे सरकारी अफसर, लोकगीतों ने जगाईं गांव की यादें

प्रीती पांडेय, नारद वार्ता, मुंबई: महानगर की भागदौड़ और सरकारी दफ्तरों की व्यस्त दिनचर्या के बीच लोकगीतों ने एक शाम ऐसी तस्वीर बनाई, जिसमें सरकारी अधिकारी भी अपने गांव और बचपन की यादों में लौटते नजर आए। फोर्ट स्थित नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के सभागार में आयोजित कजरी महोत्सव की अंतिम शाम में सावन की कजरी, सोहर और विदाई गीतों ने लोकसंस्कृति की मिठास घोल दी। अयोध्या से आईं कजरी गायिका संजोली पांडेय की प्रस्तुति पर कई अधिकारी तालियां बजाते और गीतों की लय पर झूमते दिखाई दिए।

कजरी के सुरों ने पहुंचाया गांव

अभियान संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम में संजोली पांडेय ने कजरी के साथ सोहर और विदाई जैसे पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत किए। सावन की कजरी के सुरों में गांव की मिट्टी, रिश्तों की आत्मीयता और ग्रामीण जीवन की झलक दिखाई दी। गीतों ने सभागार में मौजूद लोगों को कुछ समय के लिए मुंबई से दूर उनके गांव की गलियों, पगडंडियों, खेतों और अमराइयों तक पहुंचा दिया।

सरकारी फाइलों से लोकजीवन तक

दिनभर सरकारी फाइलों, बैठकों और आंकड़ों में व्यस्त रहने वाले अधिकारियों के लिए यह शाम अलग अनुभव लेकर आई। लोकगीतों ने उनके बचपन और गांव से जुड़ी उन स्मृतियों को छुआ, जो महानगरीय जीवन की आपाधापी में कहीं पीछे छूट गई हैं। किसी को सावन में झूले की याद आई तो किसी को गांव के आंगन और परिवार के साथ बिताए दिन याद आए।

लोकगीत मनोरंजन नहीं, सांस्कृतिक स्मृति

संजोली पांडेय की प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं। इनमें लोकआस्था, पारिवारिक रिश्ते, ग्रामीण जीवन और सामाजिक परंपराओं की स्मृतियां सुरक्षित रहती हैं। ऐसे आयोजन महानगरों में रहने वाली नई पीढ़ी को भी अपनी भाषा, संस्कृति और गांव की जड़ों से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी

कार्यक्रम में आयकर विभाग के आईआरएस अधिकारी सलिल मिश्र, सीजीएसटी के प्रमुख आयुक्त उत्कर्ष तिवारी, प्रिंसिपल कमिश्नर आलोक झा, मुकेश कुमार, सीजीएसटी आयुक्त विवेक पांडेय, पूर्व आयुक्त के.एस. मिश्र, मुकेश मिश्र, डॉ. शीतला प्रसाद दुबे और अभियान के संस्थापक अमरजीत मिश्र सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। नियंत्रक (संचार) कल्पना सिंह को स्त्री शक्ति सम्मान से सम्मानित किया गया।

दो दशक से लोकसंस्कृति संरक्षण का प्रयास

समाजसेवी और राज्य सरकार की फिल्मसिटी के पूर्व उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्र के नेतृत्व में अभियान संस्था करीब दो दशकों से सावन के दौरान कजरी महोत्सव आयोजित कर मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में लोकभाषा और लोकसंस्कृति को जीवित रखने का प्रयास कर रही है। इस वर्ष भी विभिन्न स्थानों पर आयोजन के बाद महोत्सव की अंतिम शाम नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट में संपन्न हुई।

मुंबई में गांव से जुड़ने का सांस्कृतिक सेतु

महानगर में रहने वाले लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने वाली यह शाम इस मायने में खास रही कि यहां कजरी ने केवल गीत नहीं सुनाए, बल्कि गांव की स्मृतियों को फिर से जीवंत किया।लोकगीतों के जरिए यह संदेश भी सामने आया कि शहर बदल सकता है, जीवनशैली बदल सकती है, लेकिन अपनी मिट्टी और सांस्कृतिक स्मृतियों से जुड़ाव कभी खत्म नहीं होता।

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