- 24 से 29 नवंबर तक मुंबई विश्वविद्यालय के कालीना परिसर में आयोजन; 500 से अधिक पुस्तक स्टॉल, साहित्यिक चर्चा और बच्चों के लिए होंगे विशेष कार्यक्रम
नारद वार्ता संवाददाता, मुंबई
किताबें केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि नई सोच विकसित करने और करियर की संभावनाएं तलाशने का जरिया भी हैं। इसी उद्देश्य को बढ़ावा देने के लिए मुंबई विश्वविद्यालय ने आगामी मुंबई पुस्तक महोत्सव को विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों तक पहुंचाने की पहल की है। विश्वविद्यालय के कालीना परिसर में 24 से 29 नवंबर तक आयोजित होने वाले इस छह दिवसीय महोत्सव में विभिन्न विषयों की पुस्तकें, साहित्यिक चर्चाएं, लेखकों से संवाद और बच्चों के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
मुंबई विश्वविद्यालय के ज्ञान स्रोत केंद्र की ओर से संबद्ध कॉलेजों के पुस्तकालयाध्यक्षों की विशेष बैठक आयोजित की गई। इसका उद्देश्य महोत्सव की जानकारी कॉलेजों के विद्यार्थियों, प्राध्यापकों और शोधार्थियों तक पहुंचाना तथा उन्हें पुस्तक संस्कृति से जोड़ना था। बैठक में कुलगुरु प्रो. रवींद्र कुलकर्णी, नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद मराठे और महोत्सव के नोडल अधिकारी प्रो. वाल्मिक सरवदे ने मार्गदर्शन किया।
कॉलेज लाइब्रेरी के लिए किताबें चुनने का अवसर
महोत्सव कॉलेजों के पुस्तकालयों को समृद्ध करने का भी अवसर बनेगा। यहां उपलब्ध विभिन्न विषयों की पुस्तकों के माध्यम से पुस्तकालयाध्यक्ष विद्यार्थियों की जरूरत, पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए नई किताबों का चयन कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों के अलावा साहित्य, इतिहास, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अन्य विषयों की किताबों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद मराठे ने महोत्सव में विभिन्न भारतीय भाषाओं के लेखकों और साहित्यकारों की भागीदारी की जानकारी दी। साहित्यिक चर्चा, परिसंवाद, लेखकों से संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम इसके प्रमुख आकर्षण होंगे। कॉलेजों के पुस्तकालयाध्यक्षों से विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ महोत्सव में शामिल होने की अपील की गई है।
शोधार्थियों के लिए डिजिटल संसाधनों पर जोर
बैठक के दूसरे सत्र में मुंबई विश्वविद्यालय के ज्ञान स्रोत केंद्र के निदेशक डॉ. नंदकिशोर मोतेवार ने ‘शोधचक्र’ की उपयोगिता और शोध प्रबंधन में उसकी भूमिका पर प्रस्तुति दी। विश्वविद्यालय के अनुसार, अब तक उसके 13,018 पीएचडी शोध प्रबंध ‘शोधगंगा’ डिजिटल संग्रह में जमा किए जा चुके हैं। इस उपलब्धि के साथ विश्वविद्यालय ने शोध प्रबंध जमा करने के मामले में देश में पांचवां स्थान प्राप्त किया है।शोधार्थियों के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण पहल ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ है। इसके तहत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों की 13,000 से अधिक शोध पत्रिकाओं तक पहुंच उपलब्ध कराई गई है। इन संसाधनों की मदद से विद्यार्थी अपने विषय पर गहन अध्ययन कर सकते हैं, शोध के लिए संदर्भ सामग्री जुटा सकते हैं और नए शोध निष्कर्षों से परिचित हो सकते हैं।
पीएचडी शोध प्रक्रिया को आसान बनाने की पहल
विश्वविद्यालय ने ‘शोधचक्र’ प्रणाली के तहत 2,000 से अधिक पीएचडी शोध मार्गदर्शकों और 1,368 शोधार्थियों की प्रोफाइल तैयार की हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य पीएचडी में प्रवेश से लेकर शोध पूरा होने तक की प्रक्रियाओं का प्रबंधन आसान बनाना है। वहीं, ‘शोधगंगोत्री’ के माध्यम से शोध प्रस्तावों और संभावित शोध विषयों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। इससे शोधार्थियों को नए विषय तलाशने और पहले से किए गए शोध की जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। मुंबई पुस्तक महोत्सव और डिजिटल शोध सुविधाओं से जुड़ी ये पहल विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने, कॉलेज पुस्तकालयों को उपयोगी बनाने और उच्च शिक्षा में शोध की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

