- Injustice, whether within the home or the world, can only end with the arrow of righteousness.
- मुंबई बीजेपी के उपाध्यक्ष और पूर्व राज्यमंत्री अमरजीत मिश्र ने कहा, रामलीला है जीवन का पथप्रदर्शक
- मलाड रामलीला में राम-सुग्रीव मित्रता और बाली वध का अद्भुत मंचन
- Malad Ramleela: Ram-Sugriv Friendship & Bali Vadh Emotional Stage.
- Malad Ramleela showcased Ram-Sugriv friendship and Bali Vadh with deep emotions, highlighting values of devotion, justice, and dharma.
प्रीती पांडेय, मुंबई: मलाड पूर्व के पंडित इंद्रदेव रामनरेश रामलीला मैदान में मंगलवार की रात श्रद्धालुओं ने केवल नाट्य मंचन ही नहीं देखा, बल्कि धर्म, मित्रता और त्याग का जीवंत पाठ भी सुना। राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति जैसे प्रसंगों ने दर्शकों को भक्ति और भावनाओं से भिगो दिया। मंच से गूंजती चौपाइयां और कलाकारों का सजीव अभिनय मानो त्रेतायुग को वर्तमान में उतार लाया।
राम-सुग्रीव मित्रता और बाली वध
वनवास में प्रभु श्रीराम की सुग्रीव से पहली भेंट और मित्रता का पवित्र बंधन जब मंच पर जीवंत हुआ तो पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया। हनुमान द्वारा प्रभु को सुग्रीव से मिलवाने का दृश्य श्रद्धालुओं की आंखें नम कर गया।जैसे ही चौपाई गूंजी, ‘मैं बैरी सुग्रीव पिआरा। अवगुन कवन नाथ मोहि मारा।।’ दर्शक भाव-विभोर हो उठे। इसके बाद मंचन हुआ बाली वध का। बाली जब अपने बल और अभिमान से सुग्रीव को सताता है, तब श्रीराम अन्याय और अहंकार के अंत हेतु उसका वध करते हैं। यह प्रसंग दर्शकों को गहरा संदेश देता है कि अन्याय चाहे परिवार के भीतर हो या समाज में, उसका विरोध करना ही धर्म है।
अन्याय को शान पाप को बढ़ावा देने जैसा

मुंबई बीजेपी के उपाध्यक्ष और पूर्व राज्यमंत्री अमरजीत मिश्र ने मंच पर कहा, भगवान राम-सुग्रीव मित्रता हमें सिखाती है कि सच्चा मित्र वही है जो संकट की घड़ी में साथ खड़ा हो। बाली वध यह शिक्षा देता है कि अन्याय को सहना भी उतना ही पाप है जितना करना। अपने घर-परिवार में भी यदि अन्याय दिखे, तो साहसपूर्वक उसका अंत करना ही धर्म है।’
अहंकार व्यक्ति को ले जाता है पतन की ओर
मुंबई बीजेपी के उपाध्यक्ष मिश्र ने कहा, ‘अंगद-रावण संवाद आज हमें बताता है कि जिद और अहंकार व्यक्ति को पतन की ओर ले जाते हैं। लक्ष्मण शक्ति का प्रसंग हर जीवन में यह प्रेरणा देता है कि विपत्ति चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, यदि साहस और विश्वास बना रहे तो कोई संकट टिक नहीं सकता।’
महाराष्ट्र रामलीला सेवा समिति के संरक्षक वीरेंद्र इंद्रदेव मिश्र ने कहा कि यह मंचन केवल कथा नहीं, बल्कि आधुनिक समाज के लिए मार्गदर्शन है। सच्ची मित्रता, अन्याय का विरोध और मर्यादा पालन ही रामकथा का मूल है। श्रद्धालुओं की भीड़ और आयोजन समिति इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष रामजी यादव, महेंद्र यादव, विनोद यादव, शरद यादव, सुभाष दुबे, संजय यादव, संदीप विश्वकर्मा और मुन्नू यादव सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे। पूरा मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
रामलीला के मंचन से मुंबई में त्रेतायुग का अहसास
मंचन के दौरान कभी भक्त तालियों से गूंजते, तो कभी आंखें भर आतीं। विशेषकर जब जटायु ने सीता हरण का वर्णन श्रीराम को सुनाया और जब अंगद ने रावण दरबार में अपने पाँव जमाए—उस समय श्रद्धालु मानो त्रेतायुग में पहुँच गए हों।