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वैश्विक संघर्ष के दौर में महावीर का संदेश ही मानवता का मार्ग: एकनाथ शिंदे

  • Mahavir’s Message of Non-Violence Key to Global Peace: Deputy CM Eknath Shinde

प्रीती, नारद वार्ता, मुंबई: दादर में भारत जैन महामंडल की ओर से भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्मकल्याणक महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इसमें उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि बढ़ती हिंसा और असहिष्णुता के बीच महावीर का ‘अहिंसा और संयम’ का संदेश ही विश्व को बचा सकता है। आज दुनिया हिंसा, आतंकवाद और असहिष्णुता के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में महावीर स्वामी का ‘जियो और जीने दो’ का सिद्धांत ही मानवता को बचाने का मार्ग है।

शिंदे ने कहा कि आतंकवाद ‘तुम मरोगे तो मैं जीवित रहूंगा’ की सोच पर चलता है, जबकि महावीर का दर्शन सभी के जीवन की बात करता है। उन्होंने इस अवसर को केवल जयंती नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर बताया और जैन समाज के योगदान की सराहना की। कार्यक्रम संत-महात्माओं के पावन सानिध्य और राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस केके तातेड, महामंडल के पूर्व अध्यक्ष सीए केसी जैन, सीए सीसी डांगी, लायन सुरेश जैन, बीसी जैन भलावत, बाबूलाल बाफना, महावीर कोठारी, सिद्धराज लोढ़ा, कुमार बोहरा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने समाज से सरकार और व्यापक समाज के साथ समन्वय बनाकर चलने की अपील की तथा विवादों से दूर रहने का संदेश दिया।मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम और शिवसेना (शिंदे) की राष्ट्रीय प्रवक्ता शायना एनसी ने भी महावीर स्वामी के सिद्धांतों को वर्तमान समाज के लिए मार्गदर्शक बताया।

अहंकार त्याग और जीवन में आचरण जरूरी

जनसंत श्रमणोपाध्याय 108 श्री विरजनसागर महाराज ने कहा कि केवल भगवान को मानना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके सिद्धांतों को जीवन में उतारना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया दो लोगों के अहंकार के कारण परेशान है, इसलिए अहंकार त्याग और सह-अस्तित्व जरूरी है। आचार्य नयपद्मसागर महाराज ने कहा कि हर जीव में आत्मा है और नारी समाज को संस्कारित करने की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि अहिंसा कायरता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की शक्ति है और भारत आज विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है।

जैन एकता और सामाजिक पहल पर जोर

भारत जैन महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ख्यालीलाल तातेड़ ने जैन समाज से एकजुट होने की अपील करते हुए जैन हॉस्टल निर्माण की घोषणा की। उन्होंने लाडनूं में चल रहे योगक्षेम वर्ष का उल्लेख करते हुए संगठन को मजबूत बनाने पर जोर दिया।स्वागताध्यक्ष मेहुल दिलीप पी. मेहता सहित अन्य पदाधिकारियों ने समाज सेवा और संगठन विस्तार के महत्व को रेखांकित किया। दिलीप मेहता ने बेटियों की शिक्षा के लिए हर वर्ष 10 हजार बच्चियों को शिक्षित करने का संकल्प व्यक्त किया।

युवा, महिला और सामाजिक प्रतिनिधियों की भूमिका

राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष भूपेश कोठारी ने कहा कि महावीर के विचार आज की सबसे उन्नत “टेक्नोलॉजी” हैं। वहीं महिला अध्यक्ष तरुणा बोहरा ने जैन समाज को “जन्मना नहीं, कर्मणा जैन” बनने का संदेश दिया और चारों संप्रदायों की एकता पर जोर दिया।ललित डांगी ने कहा कि महावीर के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने 2625 वर्ष पहले थे।

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